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उद्योग पर्व
अध्याय १३८
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वासुदेव उवाच
हिरण्मय़ांश्च ते कुम्भान्राजतान्पार्थिवांस्तथा |  १४   क
ओषध्यः सर्ववीजानि सर्वरत्नानि वीरुधः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति