वन पर्व  अध्याय १३६

भरद्वाज उवाच

विकुर्वाणो मुनीनां तु चरमाणो महीमिमाम् |  ८   क
आससाद महावीर्यं धनुषाक्षं मनीषिणम् ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति