अनुशासन पर्व  अध्याय १३५

भीष्म उवाच

अमानी मानदो मान्यो लोकस्वामी त्रिलोकधृक् |  ९३   क
सुमेधा मेधजो धन्यः सत्यमेधा धराधरः ||  ९३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति