अनुशासन पर्व  अध्याय १३५

भीष्म उवाच

ओजस्तेजो द्युतिधरः प्रकाशात्मा प्रतापनः |  ४३   क
ऋद्धः स्पष्टाक्षरो मन्त्रश्चन्द्रांशुर्भास्करद्युतिः ||  ४३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति