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आदि पर्व
अध्याय १३५
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वैशम्पाय़न उवाच
मात्रा सह प्रदग्धव्याः पाण्डवाः पुरुषर्षभाः |  ५   क
इति व्यवसितं पार्थ धार्तराष्ट्रस्य मे श्रुतम् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति