अनुशासन पर्व  अध्याय १३२

उमो उवाच

भगवन्सर्वभूतेश सुरासुरनमस्कृत |  १   क
धर्माधर्मे नृणां देव व्रूहि मे संशय़ं विभो ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति