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द्रोण पर्व
अध्याय १३१
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सञ्जय़ उवाच
ततो भीमात्मजं रक्षो धृष्टद्युम्नं च सानुगम् |  ११२   क
अय़ोधय़त धर्मात्मा द्रौणिरक्लिष्टकर्मकृत् ||  ११२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति