उद्योग पर्व  अध्याय १३१

कुन्त्यु उवाच

यस्य वृत्तं न जल्पन्ति मानवा महदद्भुतम् |  २०   क
राशिवर्धनमात्रं स नैव स्त्री न पुनः पुमान् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति