अनुशासन पर्व  अध्याय १२९

उमो उवाच

एतं मे संशय़ं देव मुनिधर्मकृतं विभो |  ३४   क
सर्वधर्मार्थतत्त्वज्ञ देवदेव वदस्व मे |  ३४   ख
निखिलेन मय़ा पृष्टं महादेव यथातथम् ||  ३४   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति