वन पर्व  अध्याय १२८

सोमक उवाच

व्रह्मन्यद्यद्यथा कार्यं तत्तत्कुरु तथा तथा |  १   क
पुत्रकामतय़ा सर्वं करिष्यामि वचस्तव ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति