अनुशासन पर्व  अध्याय १२८

उमो उवाच

भगवन्सर्वभूतेश सर्वधर्मभृतां वर |  २०   क
पिनाकपाणे वरद संशय़ो मे महानय़म् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति