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शान्ति पर्व
अध्याय १२६
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कृशतनुरु उवाच
संश्रुत्य नोपक्रिय़ते परं शक्त्या यथार्हतः |  ४०   क
सक्ता या सर्वभूतेषु साशा कृशतरी मय़ा ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति