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उद्योग पर्व
अध्याय १२५
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वैशम्पाय़न उवाच
भवान्क्षत्ता च राजा च आचार्यो वा पितामहः |  ४   क
मामेव परिगर्हन्ते नान्यं कञ्चन पार्थिवम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति