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अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
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भीष्म उवाच
एवं सम्पूजितं रक्षो विप्रं तं प्रत्यपूजय़त् |  ३८   क
सखाय़मकरोच्चैनं संय़ोज्यार्थैर्मुमोच ह ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति