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शान्ति पर्व
अध्याय १२५
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युधिष्ठिर उवाच
सर्वस्याशा सुमहती पुरुषस्योपजाय़ते |  ४   क
तस्यां विहन्यमानाय़ां दुःखो मृत्युरसंशय़म् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति