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शान्ति पर्व
अध्याय १२१
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भीष्म उवाच
व्रह्मणा लोकरक्षार्थं स्वधर्मस्थापनाय़ च |  ४८   क
भर्तृप्रत्यय उत्पन्नो व्यवहारस्तथापरः |  ४८   ख
तस्माद्यः सहितो दृष्टो भर्तृप्रत्ययलक्षणः ||  ४८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति