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आदि पर्व
अध्याय १२१
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राम उवाच
हिरण्यं मम यच्चान्यद्वसु किञ्चन विद्यते |  १८   क
व्राह्मणेभ्यो मय़ा दत्तं सर्वमेव तपोधन ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति