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शान्ति पर्व
अध्याय १२०
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भीष्म उवाच
सन्दर्शने सत्पुरुषं जघन्यमपि चोदय़ेत् |  ४७   क
आरम्भान्द्विषतां प्राज्ञः सर्वानर्थांस्तु सूदय़ेत् ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति