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अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
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भीष्म उवाच
अतो राजर्षय़ः सर्वे मृगय़ां यान्ति भारत |  १९   क
लिप्यन्ते न हि दोषेण न चैतत्पातकं विदुः ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति