आदि पर्व  अध्याय ११६

वैशम्पाय़न उवाच

तत एनां वलाद्राजा निजग्राह रहोगताम् |  ८   क
वार्यमाणस्तय़ा देव्या विस्फुरन्त्या यथावलम् ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति