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भीष्म पर्व
अध्याय ११३
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सञ्जय़ उवाच
पाण्डवापि महाराज स्मरन्तो विविधान्वहून् |  १४   क
क्लेशान्कृतान्सपुत्रेण त्वय़ा पूर्वं नराधिप ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति