menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय ११३
chevron_left
chevron_right
वृहस्पतिरु उवाच
अहिंसन्व्राह्मणं नित्यं न्याय़ेन परिपाल्य च |  १४   क
क्षत्रिय़स्तरसा प्राप्तमन्नं यो वै प्रय़च्छति ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति