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शान्ति पर्व
अध्याय ११२
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भीष्म उवाच
भवन्तः सर्वलोभेन केवलं भक्षणे रताः |  १५   क
अनुवन्धे तु ये दोषास्तान्न पश्यन्ति मोहिताः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति