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शल्य पर्व
अध्याय ११
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सञ्जय़ उवाच
ततः सगदमारोप्य मद्राणामृषभं रथे |  २५   क
अपोवाह कृपः शल्यं तूर्णमाय़ोधनादपि ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति