शल्य पर्व  अध्याय ११

सञ्जय़ उवाच

तं दीप्तमिव कालाग्निं पाशहस्तमिवान्तकम् |  २   क
सशृङ्गमिव कैलासं सवज्रमिव वासवम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति