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द्रोण पर्व
अध्याय ११
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सञ्जय़ उवाच
सदृशं कर्मणस्तस्य फलं प्राप्नुहि पार्थिव |  ४   क
करोमि कामं कं तेऽद्य प्रवृणीष्व यमिच्छसि ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति