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भीष्म पर्व
अध्याय १०९
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सञ्जय़ उवाच
स तु तान्प्रतिविव्याध पञ्चभिः पञ्चभिः शरैः |  २१   क
शल्यं विव्याध सप्तत्या पुनश्च दशभिः शरैः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति