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अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
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अङ्गिरा उवाच
पौषमासं तु कौन्तेय़ भक्तेनैकेन यः क्षपेत् |  १९   क
सुभगो दर्शनीय़श्च यशोभागी च जाय़ते ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति