वन पर्व  अध्याय १०४

लोमश उवाच

राजन्मा साहसं कार्षीः पुत्रान्न त्यक्तुमर्हसि |  २०   क
अलावुमध्यान्निष्कृष्य वीजं यत्नेन गोप्यताम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति