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शान्ति पर्व
अध्याय १०१
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भीष्म उवाच
पदातिनागवहुला प्रावृट्काले प्रशस्यते |  २२   क
गुणानेतान्प्रसङ्ख्याय़ देशकालौ प्रय़ोजय़ेत् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति