कर्ण पर्व  अध्याय १

वैशम्पाय़न उवाच

तय़ोर्द्वे दिवसे युद्धं कुरुपाण्डवसेनय़ोः |  १५   क
कर्णे सेनापतौ राजन्नभूदद्भुतदर्शनम् ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति