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उद्योग पर्व
अध्याय १
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कृष्ण उवाच
पित्र्यं हि राज्यं विदितं नृपाणां; यथापकृष्टं धृतराष्ट्रपुत्रैः |  १५   क
मिथ्योपचारेण तथाप्यनेन; कृच्छ्रं महत्प्राप्तमसह्यरूपम् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति