अनुशासन पर्व  अध्याय १

गौतम्यु उवाच

न व्राह्मणानां कोपोऽस्ति कुतः कोपाच्च यातना |  २०   क
मार्दवात्क्षम्यतां साधो मुच्यतामेष पन्नगः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति