शान्ति पर्व  अध्याय १

युधिष्ठिर उवाच

आश्रय़ो धार्तराष्ट्राणां मानी तीक्ष्णपराक्रमः |  २०   क
अमर्षी नित्यसंरम्भी क्षेप्तास्माकं रणे रणे ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति