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वन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
संसृष्टं व्रह्मणा क्षत्रं भूय़ एव व्यरोचत ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
संसृष्टा व्राह्मणैरेव त्रिषु वर्णेषु सृष्टय़ः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
संसेव्यमानः शत्रूंस्ते गृह्णीय़ान्महतो गणान् ||
१३ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
संस्कर्ता चोपभोक्ता च घातकाः सर्व एव ते ||
४७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४९
भीष्म उवाच
संस्कर्तुं मातृगोत्रं च मातृवर्णविनिश्चय़े ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
संस्कारं लम्भय़ामास वृष्णीनां च प्रधानतः ||
२२५ ख
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
संस्कारं लम्भय़ामास सखाय़ं पूजय़न्पितुः ||
२१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३७
व्रह्मो उवाच
संस्कारा ये च लोकेऽस्मिन्प्रवर्तन्ते पृथक्पृथक् |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
संस्कारेणोर्ध्वमाय़ान्ति यतमानाः सलोकताम् |
२८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४५
व्रह्मो उवाच
संस्कारैः संस्कृतः पूर्वं यथावच्चरितव्रतः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
संस्कारैः संस्कृतास्ते तु व्रताध्ययनसंय़ुताः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय १
ऋषय़ ऊचुः
संस्कारोपगतां व्राह्मीं नानाशास्त्रोपवृंहिताम् ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
संस्कारय़ितुमिच्छन्तो वहिर्नेतुं प्रचक्रमुः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
भीष्म उवाच
संस्कृतं पाय़सं नित्यं यवागूं कृसरं हविः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
संस्कृतं प्रसवं याति वन्यमन्नं चतुर्विधम् |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
संस्कृतः सर्वसंस्कारैस्तथैव व्रह्मचर्यवान् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
संस्कृतस्य हि दान्तस्य निय़तस्य कृतात्मनः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय २००
व्याध उवाच
संस्कृतस्य हि दान्तस्य निय़तस्य यतात्मनः |
४१ क
वन पर्व
अध्याय १९९
मार्कण्डेय़ उवाच
संस्कृताः किल मन्त्रैश्च तेऽपि स्वर्गमवाप्नुवन् ||
९ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
संस्कृत्य च कुरुश्रेष्ठं गाङ्गेय़ं कुरुसत्तमाः |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
संस्तभ्य च मनो भूय़ो राजा धैर्यसमन्वितः |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
संस्तभ्य सलिलं शेते यस्यार्थे परितप्यसे ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय १५८
गन्धर्व उवाच
संस्तम्भितं हि तरसा जितं शरणमागतम् |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय १८९
व्यास उवाच
संस्तम्भितोऽभूदथ देवराज; स्तेनेक्षितः स्थाणुरिवावतस्थे ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
संवर्त उवाच
संस्तम्भिन्या विद्यया क्षिप्रमेव; मा भैस्त्वमस्माद्भव चापि प्रतीतः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
संस्तम्भय़त मा भैष्ट विजेष्यामो रणे रिपून् ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय १२१
लोमश उवाच
संस्तम्भय़ामास च तं वासवं च्यवनः प्रभुः |
२१ ख
वन पर्व
अध्याय १२४
लोमश उवाच
संस्तम्भय़ित्वा च्यवनो जुहुवे मन्त्रतोऽनलम् |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
संस्तरे कुशलाश्चापि सर्वकर्माणि याजकाः |
२४ क
सभा पर्व
अध्याय ४१
शिशुपाल उवाच
संस्तवाय़ मनो भीष्म परेषां रमते सदा |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
संस्तवैर्गीतशव्दैश्च सूतमागधवन्दिनाम् ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
संस्तवैर्वा धनौघैर्वा नाहं शक्यः पुनस्त्वय़ा ||
१८३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२३
श्रीकृष्ण उवाच
संस्तीर्णां वसुधां पश्य चित्रपट्टैरिवावृताम् ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
संस्तीर्य च रथैर्भूमिं ससादिभिररिन्दमाः ||
१० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ७
द्रौणिरु उवाच
संस्तुवन्तो महादेवं भाः कुर्वाणाः सुवर्चसः |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १००
भीष्म उवाच
संस्तूय़ पृथिवीं देवीं वासुदेवः प्रतापवान् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
संस्तूय़मानः सूतैश्च मागधैश्च महाय़शाः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
संस्तूय़मानः सूतैश्च वन्द्यमानश्च वन्दिभिः |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
संस्तूय़मानस्त्रिदशैः प्रससाद महेश्वरः ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८
शल्य उवाच
संस्तूय़माना वर्धन्ते महात्मानो युधिष्ठिर ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
संस्तूय़मानाः स्तुतिभिः सूतमागधवन्दिभिः |
२ क
वन पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
संस्तूय़मानो गन्धर्वैरप्सरोभिश्च पाण्डवः |
९ क
वन पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
संस्तूय़मानो गन्धर्वैरृषिभिश्च तपोधनैः |
१५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
संस्तूय़मानो वहुभिः सूतमागधवन्दिभिः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय १८९
मार्कण्डेय़ उवाच
संस्तूय़मानो विप्रेन्द्रैर्मानय़ानो द्विजोत्तमान् |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
संस्तूय़मानौ तौ वीरौ तदास्तां द्युतिमत्तरौ |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
संस्तौषि त्वं तु केनापि हेतुना तौ कुदेशज |
६७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
संस्था यत्नैरपि कृता कालेन परिभिद्यते ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
संस्थानाः शूरसेनाश्च वेणिकाः कुकुरास्तथा |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
संस्थानेषु च सर्वेषु पुरेषु नगरस्य च |
७ क