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शान्ति पर्व
अध्याय १०७
मुनिरु उवाच
संश्लेषं वा करिष्यामि शाश्वतं ह्यनपाय़िनम् ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय १७
राक्षस्यु उवाच
संश्लेषिते मय़ा दैवात्कुमारः समपद्यत |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०२
भीष्म उवाच
संशय़ं गतमात्मानं मेनिरे च सहस्रशः ||
१९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २३
गान्धार्यु उवाच
संशय़ं गमय़ित्वा च कुन्तीपुत्रेण पातितः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
संशय़ं परमं प्राप्तं मज्जन्तं व्यसनार्णवे ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
संशय़ं परमं प्राप्तः पुत्रस्ते भरतर्षभ ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५१
युधिष्ठिर उवाच
संशय़ं परमं प्राप्य दिष्टान्तेनाभ्ययोजय़त् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय २९४
कर्ण उवाच
संशय़ं परमं प्राप्य विमोक्ष्ये वासवीमिमाम् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
संशय़ं परमं प्राप्य वेदनामतुलामपि |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २८
व्यास उवाच
संशय़ं परिपप्रच्छ दुःखशोकपरिप्लुतः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
संशय़ं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८९
भीष्म उवाच
संशय़ं लभते किञ्चित्तेन राजा विगर्ह्यते ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४७
भीष्म उवाच
संशय़ः प्रतिपत्तिश्च वुद्धौ पञ्चेह ये गुणाः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७६
अकृतव्रण उवाच
संशय़ः शाल्वराजस्य तेन त्वय़ि सुमध्यमे ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
संशय़ः सर्वभूतानां विजय़े नो भविष्यति ||
६४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
संशय़ः सर्वभूतानां विजय़े समपद्यत ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
संशय़ः सुगमो राजन्निर्णय़स्त्वत्र दुर्गमः |
४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
संशय़च्छेदनार्थं हि प्राप्तं मां विद्धि पुत्रक ||
२३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
संशय़च्छेदनाय़ाहं प्राप्तः कौरवनन्दन ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२६
राजो उवाच
संशय़स्तु महाप्राज्ञ सञ्जातो हृदय़े मम |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
संशय़ाच्च समुच्छेदाद्द्विषतामात्मनस्तथा ||
६७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५७
भीष्म उवाच
संशय़ात्मभिरव्यक्तैर्हिंसा समनुकीर्तिता ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
संशय़ात्मा स कामात्मा चलचित्तोऽल्पचेतनः |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय १४
युधिष्ठिर उवाच
संशय़ानां हि निर्मोक्ता त्वन्नान्यो विद्यते भुवि ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २२
व्राह्मण उवाच
संशय़ान्नाधिगच्छन्ति मनस्तानधिगच्छति ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३४
सञ्जय़ उवाच
संशय़ान्महतो मुक्तं कथञ्चित्प्रेक्षतो मम ||
६ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
संशय़े तु महत्यस्मिन्किं नु मे क्षममुत्तमम् |
५६ क
सभा पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
संशय़ो जाय़ते साम्ये साम्यं च न भवेद्द्वय़ोः ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
भीष्म उवाच
संशय़ो मे महाञ्जातस्तं मे व्याख्यातुमर्हसि ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय ६५
दुःषन्त उवाच
संशय़ो मे महानत्र तं मे छेत्तुमिहार्हसि ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२५
युधिष्ठिर उवाच
संशय़ो मे महानेष समुत्पन्नः पितामह |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०३
भीष्म उवाच
संशय़ो मे महान्कश्चित्तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५२
युधिष्ठिर उवाच
संशय़ो मे महाप्राज्ञ सुमहान्सागरोपमः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
भीष्म उवाच
संशय़ो हृदि मे कश्चित्तन्मे व्रूहि सुमध्यमे ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय २२२
शार्ङ्गका ऊचुः
संशय़ो ह्यग्निरागच्छेद्दृष्टं वाय़ोर्निवर्तनम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
संसक्त इव चाभ्रेण यथाद्रिर्महता महान् |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
संसक्तं सात्यकिं ज्ञात्वा वहुभिः कुरुपुङ्गवैः ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
संसक्तं सूतपुत्रेण दृष्ट्वा भीममरिन्दमम् |
३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
संसक्तनागौ तौ वीरौ तोमरैरितरेतरम् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
संसक्तमतितेजोभिस्तमेकं ददृशुर्जनाः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय १०९
वैशम्पाय़न उवाच
संसक्तस्तु तय़ा मृग्या मानुषीमीरय़न्गिरम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
संसक्ता इव दृश्यन्ते मेघसङ्घाः सविद्युतः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
संसक्ताः पातय़ामासुस्तव तेषां च सङ्घशः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
संसक्ताः प्रत्यदृश्यन्त मेघा इव सविद्युतः ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय १७
वासुदेव उवाच
संसक्ताः शाल्वराजस्य वहुभिर्योधपुङ्गवैः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
संसक्ताः समदृश्यन्त पत्तय़श्चापि पत्तिभिः ||
७१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६१
सञ्जय़ उवाच
संसक्तानि व्यदृश्यन्त रथवृन्दानि मारिष |
४९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
संसक्तान्पाण्डवैर्दृष्ट्वा निवृत्ताः कुरवः पुनः ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
संसक्ताश्च विय़ुक्ताश्च योधाः संन्यपतन्रणे ||
४ ग
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
संसक्तेषु च योधेषु वर्तमाने च सङ्कुले |
६७ क