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शल्य पर्व
अध्याय ३७
ऋषिरु उवाच
स हि पुत्रः सजन्याय़ामुत्पन्नो मातरिश्वना ||
५० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
स हि पुत्रान्यशोर्थं च श्रिय़ं चाप्यधिगच्छति |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८६
दुर्योधन उवाच
स हि पूज्यतमो देवः कृष्णः कमललोचनः |
५ क
वन पर्व
अध्याय २३५
चित्रसेन उवाच
स हि प्रिय़ः सखा तुभ्यं शिष्यश्च तव पाण्डवः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १७५
वैशम्पाय़न उवाच
स हि प्रय़त्नमकरोत्तीव्रमात्मविमोक्षणे |
२१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
स हि भक्तोऽनुरक्तश्च मम नित्यमिति प्रभो ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय ६४
उत्तर उवाच
स हि भीतं द्रवन्तं मां देवपुत्रो न्यवारय़त् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
वासुदेव उवाच
स हि भीमेन वलिना जातः सुरपराक्रमः ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
स हि भीमो रथश्चास्य हय़ाः सूतश्च मारिष |
५ क
आदि पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
स हि भीष्मं शान्तनवं धृतराष्ट्रं च धर्मवित् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
स हि भीष्मं समासाद्य ताडय़ामास संय़ुगे |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
स हि भूतं च भव्यं च भवच्च पुरुषर्षभ |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
स हि मद्भावितो राजा मद्भक्तश्च भविष्यति |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
स हि माता पिता चैव कृत्स्नस्य जगतो गुरुः ||
११९ ख
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
स हि मामुक्तवांस्तत्र स्मरेः कृत्येषु मामिति |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
स हि मे जातकर्मादि कारय़ामास माधव |
९ क
वन पर्व
अध्याय २१३
कन्यो उवाच
स हि मे भविता भर्ता व्रह्मण्यः कीर्तिवर्धनः ||
२४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
स हि राजा महानासीत्केकय़ेषु परन्तपः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय १६३
वसिष्ठ उवाच
स हि राजा वृहत्कीर्तिर्धर्मार्थविदुदारधीः |
२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
जनमेजय़ उवाच
स हि राजा हतामात्यो हतपुत्रो निराश्रय़ः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
स हि राज्यधुरं गुर्वीमुद्वक्ष्यति कुलस्य नः ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
युधिष्ठिर उवाच
स हि राज्यस्य मे दाता मन्त्रस्यैव च माधव |
४५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
स हि रामभय़ादेभिर्नागरैर्विप्रवासितः |
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
स हि रूपाणि कुरुते विविधानि भृगूद्वह ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७६
अम्वो उवाच
स हि लुव्धश्च मानी च जितकाशी च भार्गव |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३४
वैशम्पाय़न उवाच
स हि लोकय़ोनिरमृतस्य पदं; सूक्ष्मं पुराणमचलं परमम् |
१७ क
स्त्री पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
स हि वः पूर्वजो भ्राता भास्करान्मय़्यजाय़त |
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
स हि वीरः प्रय़ास्यन्वै धर्मराजेन वारितः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय २१
धृतराष्ट्र उवाच
स हि वीरो नरः सूत यो भग्नेषु निवर्तते |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
स हि वीरो महेष्वासः पुत्राणामभय़ङ्करः |
४३ क
वन पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
स हि वीरोऽनुरक्तश्च समर्थश्च तपोधन |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
भीष्म उवाच
स हि वेद महावाहुर्दिव्यान्यस्त्राणि सर्वशः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय १७४
वैशम्पाय़न उवाच
स हि वेदार्थतत्त्वज्ञस्तेषां गुरुरुदारधीः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
स हि व्रह्मविदां श्रेष्ठो व्रह्मास्त्रे चाप्यनुत्तमः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
स हि व्राह्मणवेगेन क्षात्रं वेगमसंशय़म् |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
स हि शक्तो रणे तात त्रीँल्लोकानपि सङ्गतान् ||
८६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
स हि शक्तो रणे राजंस्त्रातुमस्मान्महाभय़ात् |
४४ क
विराट पर्व
अध्याय ६४
उत्तर उवाच
स हि शारद्वतं द्रोणं द्रोणपुत्रं च वीर्यवान् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
स हि सङ्कर्षणः प्रोक्तः प्रद्युम्नं सोऽप्यजीजनत् ||
६८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
स हि सङ्ग्रामशोभी च भक्तश्चापि किरीटिनः ||
१६ ग
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
स हि सत्यमृतं चैव पवित्रं पुण्यमेव च ||
१९३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
स हि सन्दृश्य सेनां तां युय़ुधानेन पातिताम् |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४
व्यास उवाच
स हि सम्राडभूत्तेषां वृत्तेन च वलेन च ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२१
श्रीभगवानु उवाच
स हि सर्वगतश्चैव निर्गुणश्चैव कथ्यते ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३८
वाय़ुरु उवाच
स हि सर्वस्य लोकस्य हव्यवाट्किं न वेत्सि तम् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
स हि सर्वस्य लोकस्य हितमात्मन एव च |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४३
अतिथिरु उवाच
स हि सर्वातिथिर्नागो वुद्धिशास्त्रविशारदः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३१
व्यास उवाच
स हि सर्वेषु भूतेषु जङ्गमेषु ध्रुवेषु च |
२० क
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
स हि सृष्टो मघवता शक्तिहेतोर्महात्मना |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६९
भीष्म उवाच
स हि स्त्रीपूर्वको राजञ्शिखण्डी यदि ते श्रुतः |
२० क