आदि पर्व
अध्याय
२०७
वैशम्पाय़न उवाच
स कलिङ्गानतिक्रम्य देशानाय़तनानि च |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२६५
मार्कण्डेय़ उवाच
स कल्पवृक्षसदृशो यत्नादपि विभूषितः |
५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
५
कृप उवाच
स कल्याणे मतिं कृत्वा निय़म्यात्मानमात्मना |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
स कस्मात्त्वं जानतां ज्ञानवान्स; न्व्याय़च्छसे सञ्जय़ कौरवार्थे ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७९
वैशम्पाय़न उवाच
स कस्मात्प्राणदोऽन्येषां प्राणान्सन्त्यक्तवानसि ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
स कस्माद्भीमसेन त्वं राजानमधितिष्ठसि ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२९७
यक्ष उवाच
स कस्मान्नकुलं राजन्सापत्नं जीवमिच्छसि ||
६७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
स कस्मिंश्चित्क्षुधाविष्टः फलभारसमन्वितम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
स काकं पञ्जरे वद्ध्वा विषय़ं क्षेमदर्शिनः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
स काङ्क्षन्भीमसेनस्य वधं वैकर्तनो वृषः |
२० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
स काञ्चनविचित्राङ्गमारुरोह महारथम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
स काञ्चनविचित्रेण कवचेन समावृतः |
६ क
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
स काम इति मे वुद्धिः कर्मणां फलमुत्तमम् ||
३७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२४३
व्यास उवाच
स कामकान्तो न तु कामकामः; स वै लोकात्स्वर्गमुपैति देही ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
नाचिकेत उवाच
स कामप्रवहां शीतां नदीमेतामुपाश्नुते ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
स कामश्चित्तसङ्कल्पः शरीरं नास्य विद्यते ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
स कामानां प्रभुर्देवो ये दिव्या ये च मानुषाः |
८० क
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
स कार्त्तिकेय़स्य भय़ात्क्रौञ्चं शरणमेय़िवान् ||
७२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
स कार्मुकवरोत्सृष्टैर्नवभिर्निशितैः शरैः |
६७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
स कार्मुके महावेगं भारसाधनमुत्तमम् |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
स कार्ये साम्पराय़े तु निय़ोज्य इति मे मतिः ||
४३ ख
सभा पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
स कालं कञ्चिदाश्वस्य विश्वकर्मा प्रचिन्त्य च |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
३६
भीमसेन उवाच
स कालं वै प्रतीक्षेत सर्वप्रत्यक्षदर्शिवान् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
स कालः सोऽन्तको मृत्युः स तमो रात्र्यहानि च |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
स कालः सोऽन्तको मृत्युः स यमो रात्र्यहानि च |
६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९१
भीष्म उवाच
स कालस्य प्रभू राजन्स्वर्गस्यापि तथेश्वरः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
स कालेनेह महता सैन्धवं प्राप्तवान्सुतम् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१३७
लोमश उवाच
स काल्यमानो घोरेण शूलहस्तेन रक्षसा |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
स काशिराजं समरे सुवन्धुमनिवर्तिनम् |
६ क
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
स काशिराजस्य सुते यमजे भरतर्षभ |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
स काश्यपतपोगुप्तमाश्रमप्रवरं शुभम् |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
स काश्यपस्याय़तनं महाव्रतै; र्वृतं समन्तादृषिभिस्तपोधनैः |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
स किं शोचसि मूढः सञ्शोच्यः किमनुशोचसि |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
स किंनरमहानागमुनिगन्धर्वराक्षसान् |
३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
स किम्पुरुषगीतैश्च किंनरैरुपशोभितः |
३६ क
सभा पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
स किरातैश्च चीनैश्च वृतः प्राग्ज्योतिषोऽभवत् |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
स किलाक्षातिवापस्त्वं सभास्तारो मय़ा कृतः |
६ क
विराट पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
स कीचकमपोवाह वातवेगेन भारत ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११९
व्यास उवाच
स कीटेत्येवमाभाष्य ऋषिणा सत्यवादिना |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
स कीर्यमाणो निशितैः कर्णचापच्युतैः शरैः |
१०१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
स कुञ्जरस्थो रथिभिः शुशुभे सर्वतो वृतः |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
स कुञ्जरस्थो विसृजन्निषूनरिषु पार्थिवः |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
स कुण्डलं महत्कर्णात्कर्णस्यापातय़द्भुवि |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४३
भीष्म उवाच
स कुम्भरेताः ससृजे पुराणं; यत्रोत्पन्नमृषिमाहुर्वसिष्ठम् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
६७
वृहदश्व उवाच
स कुरुष्व महेष्वास दय़ां मय़ि नरर्षभ |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
१४६
व्राह्मण्यु उवाच
स कुरुष्व मय़ा कार्यं तारय़ात्मानमात्मना |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
स कुलं तारय़ेत्सर्वं यस्य खाते जलाशय़े |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
स कुलीनः स पुरुषः स वन्धुः स च पुण्यकृत् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
स कृच्छ्रं परमं प्राप्तो धर्मराजो युधिष्ठिरः |
२६ क