अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
भीष्म उवाच
स पालय़न्नेव महीं धर्मात्मा काशिनन्दनः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
स पालय़ामास महीमीजे च विविधैः सवैः ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
स पालय़िष्यति वशी धर्मेण पृथिवीमिमाम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
स पावय़त्यथात्मानमिह लोके परत्र च ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१४७
हनूमानु उवाच
स पितुः प्रिय़मन्विच्छन्सहभार्यः सहानुजः |
२९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
स पितुर्विक्रिय़ां दृष्ट्वा राज्यान्निरसनं तथा |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
स पितृणां निय़ोगं तमव्यतिक्रम्य पार्थिवः |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
८०
नारद उवाच
स पितॄंस्तर्पय़ामास देवांश्च परमद्युतिः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
स पितॄंस्तर्पय़ेद्गङ्गामभिगम्य सुरांस्तथा ||
६४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६३
नारद उवाच
स पितॄन्प्रीणय़ति वै प्रेत्य चानन्त्यमश्नुते ||
३२ ख
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
स पिधाय़ मुखं राजा तस्माद्गच्छति पाण्डवः ||
११ ख
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
स पीडितो महावाहुर्गृहीत्वा रथकूवरम् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
स पीड्यमानः समरे कृतास्त्रो युद्धदुर्मदः |
२६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
स पीड्यमानो वहुभिः क्षीणकोशस्त्ववाहनः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
स पीडय़ित्वा पाञ्चालान्पाण्डवांश्च तरस्विनः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१२६
लोमश उवाच
स पीत्वा शीतलं तोय़ं पिपासार्तो महीपतिः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
स पुण्यशीलः पितृवन्महात्मा; तपस्विभिर्धर्मपरैरुपेत्य |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
२७३
मार्कण्डेय़ उवाच
स पुत्रं निहतं दृष्ट्वा त्रासात्सम्भ्रान्तलोचनः |
२६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
स पुत्रं मनुजैश्वर्ये निवेश्य वनमाविशत् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९
शल्य उवाच
स पुत्रं वै त्रिशिरसमिन्द्रद्रोहात्किलासृजत् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
८०
यय़ातिरु उवाच
स पुत्रः पुत्रवद्यश्च वर्तते पितृमातृषु ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१०४
लोमश उवाच
स पुत्रकामो नृपतिस्तताप सुमहत्तपः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
स पुत्रगृद्धिनः पार्थान्सहसैन्यानवारय़त् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३९
विदुर उवाच
स पुत्रपशुभिर्वृद्धिं यशश्चाव्ययमश्नुते ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
स पुत्रमभिषिच्याथ विश्वामित्रं महातपाः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
स पुत्रवशमापन्नः प्रणिपातं प्रहास्यति ||
७५ ख
वन पर्व
अध्याय
१३६
भरद्वाज उवाच
स पुत्रशोकादुद्विग्नस्तपस्तेपे सुदुश्चरम् |
४ क
विराट पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
स पुत्रस्य वचः श्रुत्वा विराटो राष्ट्रवर्धनः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
स पुत्राञ्जनय़ामास गौतमादीन्महाय़शाः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४१
भीष्म उवाच
स पुत्रान्वहुलान्दृष्ट्वा विपुले कर्मणि स्थितः |
५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
स पुत्रे राज्यमासज्य ज्येष्ठे परमधार्मिके |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४
सूत उवाच
स पुत्रो रोषसम्पन्नः शशापैनामिति श्रुतिः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स पुनः कः ||
१६९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
स पुनः क्षत्रिय़शतैः पृथिवीमनुसन्तताम् |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८६
पराशर उवाच
स पुनर्जाय़ते राजन्प्राप्येहाय़तनं नृप |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
स पुनर्देवय़ान्योक्तः पुष्पाहारो यदृच्छय़ा |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
९४
लोमश उवाच
स पुनर्देहमास्थाय़ जीवन्स्म प्रतिदृश्यते ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
स पुनर्भरतश्रेष्ठ क्रोधाद्रक्तान्तलोचनः |
१०१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२३
धृतराष्ट्र उवाच
स पुनर्भागधेय़ेन सहाय़ानुपलव्धवान् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
स पुनर्योगमास्थाय़ मोक्षमार्गोपलव्धय़े |
६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
४
कृप उवाच
स पुनर्हृदय़ं कस्य क्रूरस्यापि न निर्दहेत् ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
स पुनस्ताञ्जघानाशु वालानपि नराधिप |
५४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
स पुरस्तादरीन्हत्वा पश्चार्धेनोत्तरेण च |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स पुरुष उत्तङ्कमभ्यभाषत |
१०२ क
आदि पर्व
अध्याय
१३२
वैशम्पाय़न उवाच
स पुरोचनमेकान्तमानीय़ भरतर्षभ |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
६
सूत उवाच
स पुलोमां ततो भार्यां पप्रच्छ कुपितो भृगुः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
स पुष्टिमिह सम्प्राप्य स्कन्दसालोक्यतामिय़ात् ||
८० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
स पूजितः पाण्डुसुतैर्यथान्याय़ं सुसत्कृतः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
स पूजितोऽसुरेन्द्रेण मुनिनोशनसा तथा |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
स पूज्यमानः पितृभिः सवान्धवै; र्घटोत्कचः कर्मणि दुष्करे कृते |
२९ क