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अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
युधिष्ठिर उवाच
स्त्रिय़ो हि मूलं दोषाणां लघुचित्ताः पितामह ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय १९७
स्त्र्यु उवाच
स्त्रिय़ो ह्यवध्याः सर्वेषां ये धर्मविदुषो जनाः ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८
अश्मो उवाच
स्त्रिय़ोऽक्षा मृगय़ा पानं प्रसङ्गान्निन्दिता वुधैः |
३१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
स्त्रिय़ोऽक्षा मृगय़ा पानं वाक्पारुष्यं च पञ्चमम् |
७४ क
वन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
स्त्रिय़ोऽक्षा मृगय़ा पानमेतत्कामसमुत्थितम् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
भीष्म उवाच
स्त्रिय़ोऽपि भक्ता या गोषु ताश्च कामानवाप्नुय़ुः ||
४५ ख
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
स्त्रिय़ोऽपि यस्यां युध्येय़ुः किं पुनर्वृष्णिपुङ्गवाः |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
स्त्रिय़ोऽप्येतेन कल्पेन कृत्वा पापमवाप्नुय़ुः |
११० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५६
च्यवन उवाच
स्त्रिय़ौ तु कारणं तत्र परिवर्ते भविष्यतः |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्री गतिः पाण्डुपुत्राणामित्युवाच सुदुर्मनाः ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
उमो उवाच
स्त्री च भूतेश सततं स्त्रिय़मेवानुधावति |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
स्त्री ह्येषा विहिता धात्रा दैवाच्च स पुनः पुमान् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीकाम तिष्ठ तिष्ठेति भीष्ममाह स पार्थिवः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
स्त्रीकामुक धिगस्तु त्वां क्षुद्रः क्षुद्रसहाय़वान् |
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
पूजन्यु उवाच
स्त्रीकृतं वास्तुजं वाग्जं ससपत्नापराधजम् ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
भीष्म उवाच
स्त्रीगुणा ऋषिभिः प्रोक्ता धर्मतत्त्वार्थदर्शिभिः |
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीणां गीतनिनादैश्च मधुरैर्मधुसूदन ||
१६ ख
विराट पर्व
अध्याय १८
द्रौपद्यु उवाच
स्त्रीणां च चित्तं दुर्ज्ञेय़ं युक्तरूपौ च मे मतौ ||
५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीणां च पुरुषाणां च सुमहान्निस्वनोऽभवत् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
स्त्रीणां तु पतिदाय़ाद्यमुपभोगफलं स्मृतम् |
२४ क
वन पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीणां धर्मात्सुघोराद्धि नान्यं पश्यामि दुष्करम् |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
नकुल उवाच
स्त्रीणां पतिसमाधीनं काङ्क्षितं च द्विजोत्तम ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
स्त्रीणां पुष्पं समासाद्य सूते कालेन भारत ||
३२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १९
गान्धार्यु उवाच
स्त्रीणां रुदितनिर्घोषः श्वापदानां च गर्जितम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय २३२
युधिष्ठिर उवाच
स्त्रीणां वाह्याभिमर्शाच्च हतं भवति नः कुलम् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३९
युधिष्ठिर उवाच
स्त्रीणां वुद्ध्युपनिष्कर्षादर्थशास्त्राणि शत्रुहन् |
९ क
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीणां सहस्रं गौरीणां सुवेषाणां सुवर्चसाम् ||
४४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
नारद उवाच
स्त्रीणां स्वभावमिच्छामि त्वत्तः श्रोतुं वरानने ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
युधिष्ठिर उवाच
स्त्रीणां स्वभावमिच्छामि श्रोतुं भरतसत्तम |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
पञ्चचूडो उवाच
स्त्रीणामगम्यो लोकेऽस्मिन्नास्ति कश्चिन्महामुने ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय १४६
व्राह्मण्यु उवाच
स्त्रीणामधर्मः सुमहान्भर्तुः पूर्वस्य लङ्घने ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय ११३
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीणामनुग्रहकरः स हि धर्मः सनातनः ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीणामागमने हेतुमहमिच्छामि वेदितुम् ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
स्त्रीत्वं तत्संस्मरन्राजन्सर्वलोकस्य पश्यतः |
८० क
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
स्त्रीत्वं तस्यानुसंस्मृत्य भीष्मो वाणाञ्शिखण्डिनः |
४६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
स्त्र्यु उवाच
स्त्रीत्वमेव वृणे शक्र प्रसन्ने त्वय़ि वासव |
४६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
भीष्म उवाच
स्त्रीदोषाञ्शाश्वतान्सत्यान्भाषितुं सम्प्रचक्रमे ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
महेश्वर उवाच
स्त्रीधर्मं श्रोतुमिच्छामि त्वय़ोदाहृतमादितः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
स्त्रीधर्मः पूर्व एवाय़ं विवाहे वन्धुभिः कृतः |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
उमो उवाच
स्त्रीधर्मकुशलास्ता वै गङ्गाद्याः सरितां वराः ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीधर्माणामभिज्ञासि शीलाचारवती तथा ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीधर्मिणी वरारोहा क्षत्रधर्मरता सदा |
८६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
कुन्त्यु उवाच
स्त्रीधर्मिणी वरारोहा क्षत्रधर्मरता सदा |
१८ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीधर्मिणी वेपमाना रुधिरेण समुक्षिता |
५४ क
सभा पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
स्त्रीधर्मिणीं वरारोहां शोणितेन समुक्षिताम् ||
१४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २३
कुन्त्यु उवाच
स्त्रीधर्मिणीमनिन्द्याङ्गीं तथा द्यूतपराजिताम् ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
स्त्रीधर्मो मां प्रति यथा प्रतिभाति यथाविधि |
३१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
स्त्रीधूर्तकेऽलसे भीरौ चण्डे पुरुषमानिनि |
५९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
स्त्रीपुंसोः पुरुषव्याघ्र यः स वेद गुणागुणान् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
स्त्रीपुंसोः समवाय़ोऽय़ं त्वय़ा वाच्यो न संसदि ||
१७२ ख