chevron_left  सोऽचिरेणैवarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
सोऽचिरेणैव कालेन तद्गजानीकमाशुगैः |
७५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
सोऽचिरेणैव कालेन तद्रथानीकमाशुगैः |
१०० क
आदि पर्व
अध्याय १२०
वैशम्पाय़न उवाच
सोऽचिरेणैव कालेन परमाचार्यतां गतः ||
२० ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
सोऽचिरेणैव कालेन विदेहानाससाद ह |
१९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
सोऽच्छिनत्कस्यचित्पादौ जघनं चैव कस्यचित् |
७१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
सोऽजिघांसुर्गुरुं सङ्ख्ये गुरोस्तनय़मेव च |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
सोऽजितात्माजितक्रोधो न चिरं तिष्ठति श्रिय़म् ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय १८४
वैशम्पाय़न उवाच
सोऽज्ञाय़मानः पुरुषानवधाय़ समन्ततः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
सोऽञ्जलिं प्रय़तः कृत्वा वाक्यमाह वनस्पतिम् |
२६ क
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
सोऽतप्यत तपो घोरं वर्षाणामय़ुतं तदा ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिक्रुद्धस्ततो राजन्नाशीविष इव श्वसन् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिक्रुद्धो महेष्वासैरभिमन्युरजिह्मगैः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४२
भीष्म उवाच
सोऽतिथिर्वचनं तस्य श्रुत्वा धर्माभिलाषिणः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धः शरैस्तीक्ष्णैर्गाण्डीवप्रेषितैर्मृधे |
६१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धस्तदा भीमो राक्षसेन महावलः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धस्तदा राजन्रणे द्रोणेन पार्थिवः |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो भृशं क्रुद्धः पदाक्रान्त इवोरगः |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महाराज तव पुत्रेण धन्विना |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महाराज द्रोणेनास्त्रविदा भृशम् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महाराज पाण्डवेन यशस्विना |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महाराज पुत्रस्तेऽतिव्यराजत |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महाराज भीष्मः सङ्ख्ये महात्मभिः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महाराज मुहूर्तमथ मारिष |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महाराज रथोपस्थ उपाविशत् |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महाराज रथोपस्थ उपाविशत् |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महाराज रथोपस्थ उपाविशत् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महावाहुः सृक्किणी परिसंलिहन् |
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासः पुत्रेण तव धन्विना |
३४ क
वन पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासः शक्त्यामितपराक्रमः |
६३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासः सम्भ्रान्त इव संय़ुगे |
१२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासः सर्वतस्तैर्महारथैः |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासः सूतपुत्रेण संय़ुगे |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासः सृक्किणी परिसंलिहन् |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासः सृक्किणी संलिहन्मुहुः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासस्तव पुत्रेण धन्विना |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासस्तेन राज्ञा महारथः |
४६ क
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासस्तोत्त्रार्दित इव द्विपः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासो दुःशासनमभाषत ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासो द्रोणपुत्रेण सात्वतः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासो नानालिङ्गैरमर्षणः |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो महेष्वासो भीमसेनो न विव्यथे |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो रणे तेन द्रोणपुत्रेण भारत |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो रणे भीमः शरं हेमविभूषितम् |
५० क
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो वलवता पार्थेन सुमहावलः |
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो वलवता पुत्रेण तव धन्विना |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो वलवता पुत्रेण तव धन्विना |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो वलवता प्रत्यपाय़ाद्रथान्तरम् ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो वलवता महेष्वासेन धन्विना |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो वलवता राक्षसेन्द्रो महावलः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
सोऽतिविद्धो वलवता शत्रुणा शत्रुकर्शनः |
१२ क