chevron_left  सुराम्वुप्रेतवित्तानांarrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
सुराम्वुप्रेतवित्तानां पतीँल्लोकेश्वरान्हय़ान् |
७४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११४
भीष्म उवाच
सुरारिनिलय़ः शश्वत्सागरः सरितां पतिः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय ७१
शुक्र उवाच
सुराश्च विश्वे च जगच्च सर्व; मुपस्थितां वैकृतिमानमन्ति ||
३६ ख
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
सुराष्ट्रविषय़स्थश्च प्रेषय़ामास रुक्मिणे |
४० क
वन पर्व
अध्याय ८६
धौम्य उवाच
सुराष्ट्रेष्वपि वक्ष्यामि पुण्यान्याय़तनानि च |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
शुक्र उवाच
सुरासवपुरस्कारा लाजोल्लेपनभूषिताः ||
६० ख
मौसल पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
सुरासवो न कर्तव्यः सर्वैर्नगरवासिभिः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
सुरासुरगणानां च ऋषीणां च तपोधन |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४८
नाग उवाच
सुरासुरगणानां च देवर्षीणां च भामिनि |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १६
सूत उवाच
सुरासुरगणान्माल्यैः सर्वतः समवाकिरन् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
भीष्म उवाच
सुरासुरगुरो देव विष्णो त्वं वक्तुमर्हसि |
२ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
सुरासुरस्य जगतो गतिस्त्वमसि शूलधृक् ||
१०८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
ऋषिरु उवाच
सुरासुरस्य जगतो गतिस्त्वमसि शूलधृक् ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
सुरासुराणां लोकानामशेषेण मनोगतम् ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
सुरासुरानवस्फूर्जन्नव्रवीत्के जय़न्त्विति ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
व्यास उवाच
सुरासुरान्नागरक्षःपिशाचा; न्नरान्सुपर्णानथ गन्धर्वय़क्षान् |
६७ क
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
सुरासुरान्वै युधि यो जय़ेत; तेनाद्य मे पश्य युद्धं सुघोरम् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३८
रुद्र उवाच
सुरासुरैरध्युषितमृषिभिश्चामितप्रभैः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
सुरासुरैरवध्यं हि पुरमेतत्खगं महत् |
५४ क
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
सुरासुरैरवध्यांस्तानहं ज्ञात्वा ततः प्रभो |
१३ क
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
सुरासुरैरसह्यं हि कर्म यत्साधितं त्वय़ा |
५३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
सुरासुरैर्यथा राजन्निर्मथ्यामृतमुद्धृतम् |
११५ क
आदि पर्व
अध्याय २९
सूत उवाच
सुरूपं पत्रमालक्ष्य सुपर्णोऽय़ं भवत्विति ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९९
नारद उवाच
सुरूपपक्षिराजेन सुवलेन च मातले |
३ क
वन पर्व
अध्याय ११३
विभाण्डक उवाच
सुरूपरूपाणि च तानि तात; प्रलोभय़न्ते विविधैरुपाय़ैः |
२ क
स्त्री पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
सुरूपवर्णा वहवः क्रव्यादैरवघट्टिताः |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७९
वसिष्ठ उवाच
सुरूपा वहुरूपाश्च विश्वरूपाश्च मातरः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
सुरूपा वहुरूपाश्च विश्वरूपाश्च मातरः |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
सुरूपाश्च विरूपाश्च तथा कल्माषकुण्डलाः |
१४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
सुरेन्द्रः स्थापितो राज्ये देवानां पुनरीश्वरः ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
सुरेन्द्रत्वं महत्प्राप्य कृतवानेतदद्भुतम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
सुरेन्द्रमिन्द्रं दैत्येन्द्रो न शुशोच न विव्यथे ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
सुरेशः शरणं शर्म विश्वरेताः प्रजाभवः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२४
सञ्जय़ उवाच
सुरेशत्वं गतः शक्रो हत्वा दैत्यान्सहस्रशः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
सुरैरवध्याः सङ्ग्रामे तेन वीरेण निर्जिताः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
महेश्वर उवाच
सुरैरेव महाभागे सर्वमेतदनुष्ठितम् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
सुरैर्वा मुनिभिर्वापि पुराणं यैरिदं श्रुतम् |
११२ क
आदि पर्व
अध्याय १
ऋषय़ ऊचुः
सुरैर्व्रह्मर्षिभिश्चैव श्रुत्वा यदभिपूजितम् ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
सुरोत्तमैरप्यविषह्यमर्दितुं; प्रसह्य नागेन जहार यद्वृषः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
सुरोदः सागरश्चैव तथान्यो घर्मसागरः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३०
भीष्म उवाच
सुरोषेणात्मनो राजन्राज्ये स्थितिमकोपय़न् |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
सुलभः सुव्रतः सिद्धः शत्रुजिच्छत्रुतापनः |
१०१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
सुलभा त्वस्य धर्मेषु मुक्तो नेति ससंशय़ा |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
सुलभाः पुरुषा राजन्सततं प्रिय़वादिनः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय २९२
वैशम्पाय़न उवाच
सुललाटं सुकेशान्तं पुत्रत्वे कल्पय़िष्यति ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
सुललाटं सुकेशान्तं सुभ्र्वक्षिदशनच्छदम् |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
सुवद्धस्यापि भारस्य पूर्ववन्धः श्लथाय़ते ||
१५ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
कर्ण उवाच
सुवन्धनं कार्मुकमन्यदाददे; यथा महाहिप्रवरं गिरेस्तथा ||
६० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
सुवभ्रुरुक्षो रुक्मस्त्वं सुषेणो दुन्दुभिस्तथा ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्चसं महात्मानं तथैवाप्यतिवर्चसम् |
४२ क