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सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
सा कृत्वा मानुषं रूपमुवाच मनुजाधिपम् |
४७ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सा कृत्वा स्यन्दनं भस्म हय़ांश्चैव ससारथीन् |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
सा कृपा सा च ते प्रीतिः सा च राजन्सुमानिता |
११ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
सा कृपासङ्गृहीतेन हृदय़ेन मनस्विनी |
९१ क
वन पर्व
अध्याय २२३
द्रौपद्यु उवाच
सा कृष्णमाराधय़ सौहृदेन; प्रेम्णा च नित्यं प्रतिकर्मणा च ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय ६०
दुर्योधन उवाच
सा कृष्यमाणा नमिताङ्गय़ष्टिः; शनैरुवाचाद्य रजस्वलास्मि |
२५ क
वन पर्व
अध्याय २५२
वैशम्पाय़न उवाच
सा कृष्यमाणा रथमारुरोह; धौम्यस्य पादावभिवाद्य कृष्णा ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय २५२
जय़द्रथ उवाच
सा क्षिप्रमातिष्ठ गजं रथं वा; न वाक्यमात्रेण वय़ं हि शक्याः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९७
भीष्म उवाच
सा गच्छत्यन्तरा छाय़ां वृक्षमाश्रित्य भामिनी |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
सा गता सह तेनैव कालय़ुक्तेन हेतुना ||
१५५ ख
आदि पर्व
अध्याय ११७
वैशम्पाय़न उवाच
सा गता सह तेनैव पतिलोकमनुव्रता |
२९ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
सा गत्वा त्रीनहोरात्रान्ददर्श परमाङ्गना |
५७ क
वन पर्व
अध्याय ७३
वृहदश्व उवाच
सा गत्वा वाहुके व्यग्रे तन्मांसमपकृष्य च |
२१ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
सा गत्वाथापरां भूमिं वाष्पसन्दिग्धय़ा गिरा |
९६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
सा गदा वेगवन्मुक्ता प्राय़ाद्द्रोणजिघांसय़ा |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
सा गदा शकलीभूता विशीर्णमणिवन्धना |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
सा गृहीता विधुन्वाना भूमावाक्षिप्य कीचकम् |
६ ख
वन पर्व
अध्याय ६०
वृहदश्व उवाच
सा ग्रस्यमाना ग्राहेण शोकेन च पराजिता |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३११
भीष्म उवाच
सा च कृत्वा तदा व्यासं कामसंविग्नमानसम् |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
सा च क्षत्रं विशिष्टं वै तत एतत्कृतं मय़ा ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
सा च तं पतिमासाद्य परं हर्षमवाप ह ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
सा च तं प्रतिविव्याध नवभिर्निशितैः शरैः |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
सा च तस्मै यथावृत्तं विस्तरेण न्यवेदय़त् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३९
वाय़ुरु उवाच
सा च तीव्रं तपस्तेपे महाभागा यशस्विनी |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
सा च ते महती सेना क्व गता पार्थिवोत्तम ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
सा च दृष्ट्वैव राजानं विचरन्तं महाद्युतिम् |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
सा च दृष्ट्वैवोत्तङ्कमभ्युत्थाय़ाभिवाद्योवाच |
११६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
सा च देवी महाभागा गान्धारी हतवान्धवा |
७ क
वन पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
सा च पुण्यजला यत्र फल्गुनामा महानदी |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
अर्जुन उवाच
सा च प्रतिज्ञा मम लोकप्रवुद्धा; भवेत्सत्या धर्मभृतां वरिष्ठ |
६३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
सा च मामव्रवीद्गच्छ विजय़ाय़ शिवाय़ च ||
१९ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
सा च वाष्पाविलमुखी प्रददर्श प्रिय़ं सुतम् ||
९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
सा च वुद्धिमती देवी कालपर्याय़वेदिनी |
११ क
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
सा च वुद्धिस्तवाधीना पुत्रि ज्ञातं मय़ेति ह |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय ११७
वैशम्पाय़न उवाच
सा च सत्यवती देवी कौसल्या च यशस्विनी |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
सा च सर्वनरेन्द्राणां चन्द्रार्कसदृशी प्रभा |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
सा चरन्ती वने तस्मिन्गां ददर्श सुमध्यमा |
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
सा चात्मनो मतं सत्यं शशंस परमर्षय़े ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय १८८
युधिष्ठिर उवाच
सा चाप्युक्तवती वाचं भैक्षवद्भुज्यतामिति |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७६
भीष्म उवाच
सा चाभिवाद्य चरणौ रामस्य शिरसा शुभा |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २१
भीष्म उवाच
सा चामृतरसप्रख्यमृषेरन्नमुपाहरत् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ७७
शर्मिष्ठो उवाच
सा चाहं च त्वय़ा राजन्भरणीय़े भजस्व माम् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय ५४
वृहदश्व उवाच
सा चिन्तय़न्ती वुद्ध्याथ तर्कय़ामास भामिनी |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय १४५
वैशम्पाय़न उवाच
सा चिन्तय़े सदा पुत्र व्राह्मणस्यास्य किं न्वहम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
सा चेद्धर्मक्रिय़ा न स्यात्त्रय़ीधर्ममृते भुवि |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
सा चैनं प्रत्युवाच |
१६४ क
वन पर्व
अध्याय १२२
लोमश उवाच
सा चैव सुदती तत्र पश्यमाना मनोरमान् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
सा छिन्ना पतिता भूमौ शक्तिः कनकभूषणा |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
सा छिन्ना भूमिमपतन्महेष्वासस्य साय़कैः ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
सा छिन्ना वहुधा राजन्द्रोणचापच्युतैः शरैः |
४९ क