अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
सहस्रवाहुः सर्वाङ्गः शरण्यः सर्वलोककृत् ||
१२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
सहस्रवाहुर्भूय़ां वै चमूमध्ये गृहेऽन्यथा ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रवाहुर्विकटो व्याघ्राक्षः क्षितिकम्पनः ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
सहस्रवाहुर्विक्रान्तः प्रादाद्भिक्षामथाग्नय़े ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
सहस्रवाहोः सदृशमक्षोभ्यमिव सागरम् |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय
२४
सूत उवाच
सहस्रशः पवनरजोभ्रमोहिता; महानिलप्रचलितपादपे वने ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रशः पारिषदाः कुमारमुपतस्थिरे |
७३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
सहस्रशः शरैर्मुक्तैः पाण्डवेन वृषेण च ||
४५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
श्वशुर उवाच
सहस्रशक्तिश्च शतं शतशक्तिर्दशापि च |
७१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
नारद उवाच
सहस्रशतसङ्ख्येन प्राणेन सततं ध्रुवम् ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
सहस्रशश्च रथिनः पतिताः पतिताय़ुधाः |
७२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
सहस्रशश्छिन्नगात्राः सारोहाः सपदानुगाः ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
सहस्रशाखं यत्साम ये वै वेदविदो जनाः |
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
सहस्रशिरसः केचित्केचित्पञ्चशताननाः |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
सहस्रशिरसे चैव सहस्रचरणाय़ च |
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
सहस्रशिरसे चैव सहस्रनय़नाय़ च |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रशिरसे तस्मै पुरुषाय़ामितात्मने |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६९
धृतराष्ट्र उवाच
सहस्रशीर्षं पुरुषं पुराण; मनादिमध्यान्तमनन्तकीर्तिम् |
६ क
मौसल पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रशीर्षः पर्वताभोगवर्ष्मा; रक्ताननः स्वां तनुं तां विमुच्य |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
सहस्रशो महाराज दर्शय़न्पाणिलाघवम् ||
९ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
सहस्रशो महाशव्दं शिखराणि पतन्ति च ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
सहस्रशो रिपून्हत्वा हतः शूरो महारथः ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
सहस्रशो वै विचरन्तमेकं; यथा महेन्द्रस्य गजं समीपे ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रशोऽथ शतशस्ततोऽस्मय़त वैतिथिः ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९७
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रशोऽन्वय़ुः पश्चादग्रतश्च सहस्रशः ||
१७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
सहस्रशोऽप्यनेकशः प्रवक्तुमुत्सहामहे |
६१ क
वन पर्व
अध्याय
९७
लोपामुद्रो उवाच
सहस्रसंमितः पुत्र एको मेऽस्तु तपोधन |
२० क
वन पर्व
अध्याय
११६
अकृतव्रण उवाच
सहस्रसंमितान्राजन्प्रगृह्य रुचिरं धनुः ||
२४ ख
सभा पर्व
अध्याय
५४
युधिष्ठिर उवाच
सहस्रसङ्ख्या नागा मे मत्तास्तिष्ठन्ति सौवल |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
सहस्रसङ्ख्या वलिनः सर्वे रौद्राः स्वभावतः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रसङ्ख्यान्समितान्सुतान्दक्षस्य नारदः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
सहस्रसूर्यः शतकिङ्किणीकः; परार्ध्यजाम्वूनदहेमचित्रः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१९४
मार्कण्डेय़ उवाच
सहस्रसूर्यप्रतिममद्भुतोपमदर्शनम् ||
१५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
सहस्रसोमप्रतिमा वभूवुः; पुरे कुरूणामुदय़ेन्दुनाम्नि |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रस्तम्भां हेमवैडूर्यचित्रां; शतद्वारां तोरणस्फाटिशृङ्गाम् |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
सहस्रहंससंय़ुक्ते विमाने सोमवर्चसि |
५४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
सहस्रहस्तो विजय़ो व्यवसाय़ो ह्यनिन्दितः ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय
१६२
गन्धर्व उवाच
सहस्रांशुं ततो विप्रः कृताञ्जलिरुपस्थितः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्राक्षनिय़ोगात्स पार्थः शक्रासनं तदा |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
सहस्राक्षसमं तत्र सिद्धचारणमानवाः |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३५
कुन्त्यु उवाच
सहस्राक्षसमः कुन्ति भविष्यत्येष ते सुतः ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
सहस्राक्षस्तदा भूत्वा वज्रपाणिर्महाय़शाः ||
८८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
सहस्राक्षेण राजा हि सर्व एवोपमीय़ते |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९६
भीष्म उवाच
सहस्राक्षो देवराट्सम्प्रहृष्टः; समीक्ष्य तं कोपनं विप्रमुख्यम् ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
सहस्राक्षो महेन्द्रश्च तथा प्राचेतसो मनुः ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
सहस्राक्षो विरूपाक्षः सोमो नक्षत्रसाधकः ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४६
वासुदेव उवाच
सहस्राक्षोऽय़ुताक्षो वा सर्वतोक्षिमय़ोऽपि वा |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
सहस्राक्षोऽय़ुताक्षो वा सर्वतोक्षिमय़ोऽपि वा |
९१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
नहुष उवाच
सहस्राणां शतं क्षिप्रं निषादेभ्यः प्रदीय़ताम् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
सहस्राणां शतान्येव यतो वर्षति वासवः ||
३१ ख