वन पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे नागाय़ुतप्राणा वज्रसंहनना दृढाः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८१
भीष्म उवाच
सर्वे नित्यं शङ्कितव्याः प्रत्यक्षं कार्यमात्मनः ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
सर्वे निवारय़ामासुर्देवापेरभिषेचनम् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे निवेदय़ामासुः कर्म तत्फल्गुनस्य ह ||
२५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
सर्वे नृपास्तु समरे धनञ्जय़मय़ोधय़न् |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
सर्वे पलाय़न्त भय़ाभिपन्ना; नाय़ं मनुष्य इति भाषमाणाः ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
सर्वे पाञ्चाला ह्युद्विजन्ते स्म कर्णा; द्गन्धाद्गावः केसरिणो यथैव ||
९ ख
विराट पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे पुरस्ताद्विततेषुचापा; दुर्योधनार्थं त्वरिताभ्युपेय़ुः ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६
भीष्म उवाच
सर्वे पुरुषकारेण मानुष्याद्देवतां गताः ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२३
भीष्म उवाच
सर्वे पूज्याः श्रुतधनास्तथैव च तपस्विनः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३७
भीष्म उवाच
सर्वे पूज्याश्च मान्याश्च श्रुतवृत्तोपसंहिताः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
सर्वे प्रजानां पतय़ः सर्वे चातितपस्विनः |
४७ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे प्रजापतिसमाः प्रजावन्तस्तथैव च |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे प्रत्यक्षधर्माणो जितक्रोधा जितेन्द्रिय़ाः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
८८
अष्टक उवाच
सर्वे प्रदाय़ भवते गन्तारो नरकं वय़म् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
सर्वे प्रमाणं हि यथा तथैतच्छास्त्रमुत्तमम् ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
सर्वे प्रहरतां श्रेष्ठाः सर्वे चामिततेजसः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
३५
सूत उवाच
सर्वे प्रहृष्टमनसः साधु साध्वित्यपूजय़न् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
सर्वे प्राञ्जलय़ो दाशाः शिरोभिः प्रापतन्भुवि ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
अश्व उवाच
सर्वे प्राञ्जलय़ो नागा वृद्धवालपुरोगमाः |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे प्रैक्षन्त कुरव एकवस्त्रां सभागताम् ||
५० ख
वन पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
सर्वे भवन्तस्तिष्ठन्तु सर्वे पश्यन्तु मां युधि |
३० क
वन पर्व
अध्याय
१८१
मार्कण्डेय़ उवाच
सर्वे भवन्तस्त्वतिवीर्यसत्त्वा; दिव्यौजसः संहननोपपन्नाः |
३९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३९
व्यास उवाच
सर्वे भवन्तो गच्छन्तु नदीं भागीरथीं प्रति |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे भवन्तो गच्छन्तु सर्वा मेऽपचितिः कृता ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
८
शकुनिरु उवाच
सर्वे भवामो मध्यस्था राज्ञश्छन्दानुवर्तिनः |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
सर्वे भवेय़ुः सिद्धार्था वहु कत्थेत दुर्गतः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे भागान्कल्पय़ध्वं यज्ञेषु मम नित्यशः |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१५
भीष्म उवाच
सर्वे भावास्तथाभावाः पुरुषार्थो न विद्यते ||
१५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे भासुरदेहास्ते समुत्तस्थुर्जलात्ततः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४
नारद उवाच
सर्वे भास्वरदेहाश्च व्याघ्रा इव मदोत्कटाः ||
९ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
सर्वे भास्वरदेहाश्च सर्वे च विरजोम्वराः ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे भास्वरदेहास्ते चत्वारः समरूपिणः |
४० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे मन्त्रगृहे वर्ज्या ये चापि जडपङ्गुकाः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७
युधिष्ठिर उवाच
सर्वे मामनुजानीत त्यक्ष्यामीदं कलेवरम् ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
सर्वे मामव्रुवन्हृष्टाः प्रय़ाहि जहि शात्रवान् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
सर्वे माय़ाशतधराः सर्वे ते कामचारिणः |
५८ क
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
सर्वे म्लेच्छाः सर्ववर्णा आदिमध्यान्तजास्तथा |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
सर्वे यथार्थदातारः सर्वे विगतमत्सराः |
६१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
सर्वे यान्ति पराँल्लोकान्स्वकर्मफलनिर्जितान् ||
२७ ग
विराट पर्व
अध्याय
४४
कृप उवाच
सर्वे युध्यामहे पार्थं कर्ण मा साहसं कृथाः ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७६
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे युय़ुधिरे वीरा रथस्थास्तं पदातिनम् ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
सर्वे यूय़ं महाभागा गन्धर्वाश्चैव सर्वशः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
सर्वे योगा राजधर्मेषु चोक्ताः; सर्वे लोका राजधर्मान्प्रविष्टाः ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
सर्वे रक्तपताकाश्च सर्वे वै हेममालिनः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
सर्वे राजन्न्यवर्तन्त क्षत्रिय़ाः कालचोदिताः ||
५० ग
वन पर्व
अध्याय
१३४
वन्द्यु उवाच
सर्वे राज्ञो मैथिलस्य मैनाकस्येव पर्वताः |
५ क
सभा पर्व
अध्याय
९
नारद उवाच
सर्वे लव्धवराः शूराः सर्वे विगतमृत्यवः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
सर्वे लाभाः साभिमाना इति सत्या वत श्रुतिः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१४१
भीम उवाच
सर्वे लालसभूताः स्म तस्माद्यास्यामहे सह ||
१४ ख