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उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
शिखण्डिने लक्षणं पापवुद्धे; स्त्रीलक्षणं चाग्रहीः पापकर्मन् ||
४२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डिनो मुकुटिनो मुण्डाश्च जटिलास्तथा ||
९० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनो वधे यत्ताः सर्वे तिष्ठन्तु मामकाः ||
१६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डिपुत्राः सर्वे च धृष्टकेतुश्च सानुजः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिप्रमुखान्पार्थान्योधय़न्ति स्म संय़ुगे ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिप्रमुखान्पार्थान्योधय़न्ति स्म संय़ुगे ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
शिखण्डिवाक्यं श्रुत्वाथ स यक्षो भरतर्षभ |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
कर्ण उवाच
शिखण्डिशैनेय़यमाः शितैः शरै; र्विदारय़न्तो व्यनदन्सुभैरवम् ||
६६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
शिखण्डी किल पुत्रस्ते कन्येति परिशङ्कितः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी कृतवर्माणं गौतमं च महारथम् |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी कृतवर्माणं समासादय़दच्युतम् ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५६
धृतराष्ट्र उवाच
शिखण्डी क्षत्रदेवश्च तथा वैराटिरुत्तरः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी च ततः कर्णं विचरन्तमभीतवत् |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी च महानागान्सिषिचुः शरवृष्टिभिः ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी च महावाहो भीष्मस्य निधनं किल ||
३० ग
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी च महेष्वासो राजा चैव युधिष्ठिरः ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी च यय़ौ कर्णं धृष्टद्युम्नः सुतं तव |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी च समासाद्य हृदिकानां महारथम् |
६२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी चापि हार्दिक्यं विद्ध्वा पञ्चभिराशुगैः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तं च विव्याध भरतानां पितामहम् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु ततः क्रुद्धः सौमदत्तिं विशां पते |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु ततः क्रुद्धश्छिन्ने धनुषि सत्वरम् |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु ततः क्रुद्धो गौतमं त्वरितो यय़ौ |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु ततः खड्गं खण्डितं तेन साय़कैः |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु ततः पश्चादर्जुनेनाभिरक्षितः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु भृशं राजंस्ताड्यमानः शितैः शरैः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु महाराज गौतमस्य महद्धनुः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु महाराज भरतानां पितामहम् |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु महेष्वासः सोमकैः संवृतो वली |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु रणे भीष्ममासाद्य भरतर्षभ |
७८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु रणे राजन्विव्याधैव पितामहम् |
९८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु रणे वाणान्यान्मुमोच महाव्रते |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु रथश्रेष्ठो रक्ष्यमाणः किरीटिना |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु समासाद्य द्रोणं शस्त्रभृतां वरम् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु समासाद्य भरतानां पितामहम् |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु समासाद्य भरतानां पितामहम् |
६३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी तु समासाद्य भारतानां पितामहम् |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी दशभिर्वीरो धर्मराजः शतेन तु ||
७१ ग
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डी द्रुपदाज्जज्ञे कन्या पुत्रत्वमागता |
१०४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डी नहुषो वभ्रुर्दिवस्पृक्त्वं पुनर्वसुः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
अर्जुन उवाच
शिखण्डी निधनं कृष्ण भीष्मस्य भविता ध्रुवम् |
९७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी पञ्चविंशत्या धृष्टद्युम्नश्च पञ्चभिः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी पञ्चविंशत्या भीष्मं विव्याध साय़कैः ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५९
वासुदेव उवाच
शिखण्डी पाण्डुपुत्राणां नेता सप्तचमूपतिः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९५
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डी युय़ुधानश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६९
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी रक्षितस्तेन स च मृत्युर्महात्मनः ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
शिखण्डी रथमुख्यो मे मतः पार्थस्य भारत ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी विजय़श्चैव राक्षसश्च घटोत्कचः |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
शिखण्डी समराकाङ्क्षी शूरश्च समितिञ्जय़ः ||
७५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डी समरे राजन्द्रौणिमभ्युद्ययौ वली |
४३ क