शल्य पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
वासश्च ते सदा देव सागरे मकरालय़े |
७ क
विराट पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
वासश्च परिधाय़ैकं कृष्णं सुमलिनं महत् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
वासश्चापहरेत्तस्मिन्कथं ते मानसं भवेत् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
यम उवाच
वाससां तु प्रदानेन स्वदारनिरतो नरः |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
वाससोऽर्धं परिच्छिद्य त्यक्तवान्मामनागसम् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
वासांसि च महार्हाणि नानादेश्यानि माधवः |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
वासांसि च महार्हाणि पर्यङ्कास्तरणानि च |
२३ क
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
वासांसि च महार्हाणि मणींश्चैव महाधनान् |
५३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
वासांसि च महार्हाणि माल्यानि विविधानि च |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
११०
वैशम्पाय़न उवाच
वासांसि च महार्हाणि स्त्रीणामाभरणानि च ||
३६ ग
सभा पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
वासांसि च शुभान्यस्मै प्रददू राजशासनात् ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय़; नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि |
२२ क
विराट पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
वासांसि परिजीर्णानि लव्धान्यन्तःपुरेऽर्जुनः |
७ क
विराट पर्व
अध्याय
८
द्रौपद्यु उवाच
वासांसि यावच्च लभे तावत्तावद्रमे तथा ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
वासांसि स समादत्त पर्याप्तं तन्निदर्शनम् ||
९ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
वासांस्युत्सृज्य नृत्यन्ति स्त्रिय़ो या मद्यमोहिताः |
८५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
वासान्कृत्वा क्रमेणाथ जग्मुस्ते कुरुपुङ्गवाः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४९
व्राह्मण उवाच
वासार्थिनं महाप्राज्ञ वलवन्तमुपास्मि ह ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
वासाय़ खाण्डवप्रस्थं व्रजध्वं गतमन्यवः ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
वासिताश्च महारण्ये वर्षाणीह त्रय़ोदश ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०४
नारद उवाच
वासिष्ठं वेषमास्थाय़ कौशिकं भोजनेप्सय़ा ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
वासिष्ठं समतिक्रम्य सर्वे वर्णा द्विजातय़ः ||
४३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
अश्व उवाच
वासुकिप्रमुखानां च नागानां जनमेजय़ ||
४७ ख
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
वासुकिर्नागराजोऽय़ं दुःखितो ज्ञातिकारणात् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
वासुकिश्चापि तच्छ्रुत्वा पितामहवचस्तदा |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
३३
सूत उवाच
वासुकिश्चापि सञ्चिन्त्य तानुवाच भुजङ्गमान् ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
वासुकिश्चित्रसेनश्च तक्षकश्चोपतक्षकः |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
३३
सूत उवाच
वासुकिश्चिन्तय़ामास शापोऽय़ं न भवेत्कथम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
वासुकिस्तक्षकश्चैव कर्कोटकधनञ्जय़ौ |
९ क
सभा पर्व
अध्याय
९
नारद उवाच
वासुकिस्तक्षकश्चैव नागश्चैरावतस्तथा |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
वासुकिस्त्वव्रवीद्वाक्यं जरत्कारुमृषिं तदा |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
वासुके भरणं चास्या न कुर्यामित्युवाच ह ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
५२
सूत उवाच
वासुकेः कुलजांस्तावत्प्राधान्येन निवोध मे |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१६
सूत उवाच
वासुकेरथ नागस्य सहसाक्षिप्यतः सुरैः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
वासुकेर्नागराजस्य वचनादिदमव्रवीत् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
वासुकेर्भगिनी भीता धर्मलोपान्मनस्विनी ||
१४ ग
आदि पर्व
अध्याय
३४
सूत उवाच
वासुकेश्च वचः श्रुत्वा एलापत्रोऽव्रवीदिदम् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
वासुदेव इति ज्ञेय़ो यन्मां पृच्छसि भारत ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६९
व्राह्मण उवाच
वासुदेव इमं श्लोकं जगाद कुरुनन्दन ||
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७२
भीमसेन उवाच
वासुदेव तथा कार्यं न कुरूननय़ः स्पृशेत् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
वासुदेव तदेतत्ते मय़ोद्गीतं यथातथम् ||
६४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेव मतज्ञोऽसि मम सभ्रातृकस्य च ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१६
युधिष्ठिर उवाच
वासुदेव महावाहो विस्तरेण महामते |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेव महावाहो सुप्रजा देवकी त्वय़ा |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
वासुदेवं कथय़तां समवाय़े पुरातनम् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं च दशभिः प्रत्यविध्यत्स्तनान्तरे |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं च दशभिर्द्रौणिर्विव्याध भारत ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं च वार्ष्णेय़ं प्रीय़माणं किरीटिना ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं च वार्ष्णेय़ं शरवर्षैः समन्ततः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं च विंशत्या ताडय़ामास संय़ुगे ||
३० ख