उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां त्रय़ो वर्णाः कच्चित्तिष्ठन्ति शासने ||
६२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां नमस्कर्ता युधिष्ठिर न रिष्यते ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२८७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां नमस्कारैः सूर्यो दिवि विराजते ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां निवेद्याग्रमभुञ्जन्पुरुषर्षभाः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां परिक्लेशो दैवतान्यपि सादय़ेत् |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां परिभवः सादय़ेदपि देवताः |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
व्राह्मणानां परिभवात्परिवादाच्च भारत |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३५
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां परिभवादसुराः सलिलेशय़ाः |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
१९७
स्त्र्यु उवाच
व्राह्मणानां परिभवाद्वातापिश्च दुरात्मवान् |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८४
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां पितॄणां च देवतानां च सर्वशः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२४
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां प्रकोपेन प्रविष्टो वसुधातलम् |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
व्राह्मणानां प्रतिष्ठासीत्स्रोतसामिव सागरः |
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां प्रतीतानामृषीणामिव वासवः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३५
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां प्रसादाच्च देवाः स्वर्गनिवासिनः ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१
युधिष्ठिर उवाच
व्राह्मणानां प्रसादेन भीमार्जुनवलेन च ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२९
श्रीभगवानु उवाच
व्राह्मणानां मतिर्वाक्यं कर्म श्रद्धा तपांसि च |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां मतेनाह पाण्डवानां च केशवः ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां महाराज चेष्टाः संसिद्धिकारिकाः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१३४
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां महीपाल रतानां स्वेषु कर्मसु ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां मूलफलं धर्म्यमाहुर्मनीषिणः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५५
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां यथा धर्मो दानमध्ययनं तपः |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां विशां चैव वहुमृष्टान्नमृद्धिमत् ||
९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२३७
व्यास उवाच
व्राह्मणानां विशेषेण नैव व्रूय़ात्कथञ्चन ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां शतं श्रेष्ठं मुखादसृजत प्रभुः ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४४
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां सतामेष धर्मो नित्यं युधिष्ठिर ||
३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां सहस्रं च स्नातकानां महात्मनाम् |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११३
वृहस्पतिरु उवाच
व्राह्मणानां सहस्राणि दश भोज्य नरर्षभ |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां सहस्राणि पृथगेकैकमुद्दिशन् |
५ क
वन पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानां सहस्राणि स्नातकानां महात्मनाम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८१
भृगुरु उवाच
व्राह्मणानां सितो वर्णः क्षत्रिय़ाणां तु लोहितः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४८
शौनक उवाच
व्राह्मणानां सुखार्थं त्वं पर्येहि पृथिवीमिमाम् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०५
धृतराष्ट्र उवाच
व्राह्मणानां हस्तिभिर्नास्ति कृत्यं; राजन्यानां नागकुलानि विप्र |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
व्राह्मणानां हृते क्षेत्रे हन्यात्त्रिपुरुषं कुलम् ||
७६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
भीष्म उवाच
व्राह्मणानामनुमतो देवर्षिसदृशोऽभवत् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
व्राह्मणानामनुष्ठानमत्यन्तं सुखमिच्छता |
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानामसाध्यं च त्रिषु संस्थानचारिषु ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४३
सनत्सुजात उवाच
व्राह्मणानामिमे लोका ऋद्धे तपसि संय़ताः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणानुमतान्पुण्यानाश्रमान्भरतर्षभ |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
पृथिव्यु उवाच
व्राह्मणानुमते तिष्ठेत्पुरुषः शुचिरात्मवान् ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
भीष्म उवाच
व्राह्मणानेव सततं भृशं सम्प्रतिपूजय़ेत् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४७
भीष्म उवाच
व्राह्मणानेव सेवस्व सत्कृत्य वहुमन्य च |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
पृथिव्यु उवाच
व्राह्मणानेव सेवेत पवित्रं ह्येतदुत्तमम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
व्राह्मणानेव सेवेत विद्यावृद्धांस्तपस्विनः |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४२
वाय़ुरु उवाच
व्राह्मणान्क्षत्रधर्मेण पालय़स्वेन्द्रिय़ाणि च |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणान्क्षत्रिय़ा राजन्गर्भार्थिन्योऽभिचक्रमुः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणान्क्षत्रिय़ांश्चैव पृच्छन्नास्ते महारथः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणान्क्षत्रिय़ान्वैश्याञ्शूद्रांश्चैवाप्यपीडय़न् |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
१७५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणान्ददृशुर्मार्गे गच्छतः सगणान्वहून् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
व्राह्मणान्दुर्वलानाथान्दीनान्धकृपणांस्तथा |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
व्राह्मणान्न परीक्षेत क्षत्रिय़ो दानधर्मवित् |
२ क