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उद्योग पर्व
अध्याय ७५
भगवानु उवाच
वेदाहं तव माहात्म्यमुत ते वेद यद्वलम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
वेदाहं तव या वुद्धिरानृशंस्यगुणैव सा |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय ७४
देवय़ान्यु उवाच
वेदाहं तात वालापि धर्माणां यदिहान्तरम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९
युधिष्ठिर उवाच
वेदाहं तात शास्त्राणि अपराणि पराणि च |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय २९
श्रीभगवानु उवाच
वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन |
२६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १७
वासुदेव उवाच
वेदाहं हि महादेवं तत्त्वेन भरतर्षभ |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
वेदिकापाश्रिताभिश्च समाक्रान्तान्यनेकशः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
वेदितव्यं नरश्रेष्ठ सदेवनरदानवे ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
वेदितव्यानि मित्राणि वोद्धव्याश्चापि शत्रवः |
१३० क
आदि पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
वेदिमध्याच्च कृष्णाय़ाः सम्भवः कथमद्भुतः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १२९
लोमश उवाच
वेदी प्रजापतेरेषा समन्तात्पञ्चय़ोजना |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९९
इन्द्र उवाच
वेदी यस्य त्वमित्राणां शिरोभिरवकीर्यते |
३५ क
वन पर्व
अध्याय ८६
धौम्य उवाच
वेदी शूर्पारके तात जमदग्नेर्महात्मनः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
वेदीं कमण्डलुं दर्भान्मणिरूपानथोपलान् |
९ क
वन पर्व
अध्याय ११७
अकृतव्रण उवाच
वेदीं चाप्यददद्धैमीं कश्यपाय़ महात्मने |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
युधिष्ठिर उवाच
वेदीमध्या दीर्घकेशी ताम्राक्षी नातिरोमशा ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय १७५
व्राह्मणा ऊचुः
वेदीमध्यात्समुत्पन्ना पद्मपत्रनिभेक्षणा ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
नारद उवाच
वेदीमष्टतलोत्सेधां भूमावास्थाय़ विश्वभुक् |
४७ क
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
वेदीविलग्नमध्येव विभ्रती रूपमुत्तमम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
वेदे च निय़तं राजनभिगच्छेत्पृथूदकम् ||
१२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
वेदे चास्य विदुर्विप्राः शतरुद्रीय़मुत्तमम् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
वेदे चास्य समाम्नातं शतरुद्रीय़मुत्तमम् |
७९ क
आदि पर्व
अध्याय १५९
गन्धर्व उवाच
वेदे धनुषि चाचार्यमभिजानामि तेऽर्जुन |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३४
शुक उवाच
वेदे वचनमुक्तं तु कुरु कर्म त्यजेति च |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
युधिष्ठिर उवाच
वेदे वा यत्समाम्नातं तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १५९
गन्धर्व उवाच
वेदे षडङ्गे निरताः शुचय़ः सत्यवादिनः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६२
कपिल उवाच
वेदे हि निष्ठा सर्वस्य यद्यदस्ति च नास्ति च ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०३
भीष्म उवाच
वेदेषु चापि यद्वाक्यं लौकिकं व्यापकं च यत् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०४
याज्ञवल्क्य उवाच
वेदेषु चाष्टगुणितं योगमाहुर्मनीषिणः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
वेदेषु चैव निष्णातो हिमवत्पादसंश्रय़ः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
वेदेषु निष्ठां सम्प्राप्य साङ्गेष्वतितपस्विनः |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३०
श्रीभगवानु उवाच
वेदेषु यज्ञेषु तपःसु चैव; दानेषु यत्पुण्यफलं प्रदिष्टम् |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
वेदेषु व्राह्मणैः प्रोक्तास्ताश्च सर्वाः समाचरेत् ||
१२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
अर्जुन उवाच
वेदेषु सपुराणेषु यानि गुह्यानि कर्मभिः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२१
भीष्म उवाच
वेदेषु सपुराणेषु साङ्गोपाङ्गेषु गीय़से |
२४ क
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
वेदेषु सरहस्येषु धनुर्वेदे च पारगाः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
वेदेष्वपि वदन्तीमं मन्त्रवादं द्विजातय़ः |
६१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४३
कुन्त्यु उवाच
वेदैः परिवृतो व्रह्मा यथा वेदाङ्गपञ्चमैः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
वेदैर्यज्ञाः समुत्पन्ना यज्ञैर्देवाः प्रतिष्ठिताः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३७
श्रीभगवानु उवाच
वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो; वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १
ऋषय़ ऊचुः
वेदैश्चतुर्भिः समितां व्यासस्याद्भुतकर्मणः |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
भीष्म उवाच
वेदैष मार्गं स्वर्गस्य तथैव नरकस्य च |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
वेदो वेदविदव्यङ्गो वेदाङ्गो वेदवित्कविः ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
महेश्वर उवाच
वेदोक्तः परमो धर्मः स्मृतिशास्त्रगतोऽपरः |
५ क
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
वेदोक्तः परमो धर्मो धर्मशास्त्रेषु चापरः |
७८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
वेदोक्तस्य च धर्मस्य फलं मुख्यमवाप्स्यसि ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
वेदोक्ताः पृथिवीपाल येषु यज्ञाः प्रतिष्ठिताः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
भीष्म उवाच
वेदोक्ताश्चैव ये धर्मा वेदान्तनिहिताश्च ये |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
वेदोक्तेन प्रमाणेन पितॄणां प्रक्रिय़ासु च |
५० ख
आदि पर्व
अध्याय ७
सूत उवाच
वेदोक्तेन विधानेन मय़ि यद्धूय़ते हविः |
७ क