अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
विवाहवैशेष्यकृतः पूर्वः पूर्वो विशिष्यते ||
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२११
वासुदेव उवाच
विवाहहेतोः शूराणामिति धर्मविदो विदुः ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
यम उवाच
विवाहांश्चैव कुर्वीत पुत्रानुत्पादय़ेत च |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय
१६१
गन्धर्व उवाच
विवाहानां हि रम्भोरु गान्धर्वः श्रेष्ठ उच्यते ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
६७
दुःषन्त उवाच
विवाहानां हि रम्भोरु गान्धर्वः श्रेष्ठ उच्यते ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२४८
वैशम्पाय़न उवाच
विवाहार्थो न मे कश्चिदिमां दृष्ट्वातिसुन्दरीम् |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिं च विंशत्या विरथं कृतवान्प्रभो |
११९ क
वन पर्व
अध्याय
२३१
वैशम्पाय़न उवाच
विविंशतिं चित्रसेनमादाय़ान्ये प्रदुद्रुवुः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिं भीमसेनो विंशत्या निशितैः शरैः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिं शरैर्विद्ध्वा नाभ्यवर्तत दंशितः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिः पञ्चभिश्च त्रिभिर्दुःशासनस्तथा ||
२४ ग
स्त्री पर्व
अध्याय
१९
गान्धार्यु उवाच
विविंशतिरसौ शेते ध्वस्तः पांसुषु माधव ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
विविंशतिर्ददौ पीठं काञ्चनं कृतवर्मणे ||
४७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिर्महाराज राजपुत्रो महावलः |
७ क
विराट पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
विविंशतिर्विकर्णश्च चित्रसेनश्च वीर्यवान् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१०८
वैशम्पाय़न उवाच
विविंशतिर्विकर्णश्च जलसन्धः सुलोचनः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१७७
धृष्टद्युम्न उवाच
विविंशतिर्विकर्णश्च सहो दुःशासनः समः ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
५२
विदुर उवाच
विविंशतिश्चित्रसेनश्च राजा; सत्यव्रतः पुरुमित्रो जय़श्च ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिश्चित्रसेनो विकर्णश्च तवात्मजः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिश्चित्रसेनो विकर्णश्च महारथः ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिश्चित्रसेनो विकर्णश्च महारथः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिश्चित्रसेनो विकर्णश्च महारथः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिस्तु विंशत्या कृतवर्मा च सप्तभिः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
विविंशतिस्तु सहसा व्यश्वकेतुशरासनम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
विविंशतेर्दुर्मुखस्य चित्रसेनविकर्णय़ोः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
विविंशतेश्च द्रौणेश्च यन्तारौ समताडय़त् |
३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
विविंशस्य सुता राजन्वभूवुर्दश पञ्च च |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०८
गुरुरु उवाच
विविक्तचारी लघ्वाशी तपस्वी निय़तेन्द्रिय़ः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
१९२
वैशम्पाय़न उवाच
विविक्तमिति वक्ष्यावः किं तवेदं चिकीर्षितम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
वसिष्ठ उवाच
विविक्तशीलाय़ विधिप्रिय़ाय़; विवादहीनाय़ वहुश्रुताय़ |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
विविक्तसेवी लघ्वाशी यतवाक्काय़मानसः |
५२ क
आदि पर्व
अध्याय
२०८
वैशम्पाय़न उवाच
विविक्तान्युपलक्ष्याथ तानि तीर्थानि पाण्डवः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९२
वसिष्ठ उवाच
विविक्ताश्च शिलाछाय़ास्तथा प्रस्रवणानि च |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४९
भीष्म उवाच
विविक्ते गोमतीतीरे किं वा त्वं पर्युपाससे ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
विविक्ते पतिमासाद्य हसन्तीव शुचिस्मिता |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
विविक्ते पर्वततटे पाराशर्यो महातपाः |
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
विविक्ते पर्वतोद्देशे सुखासीनं महाभुजम् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३५
वैशम्पाय़न उवाच
विविक्ते पाण्डवान्राजन्निदं वचनमव्रवीत् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२००
वैशम्पाय़न उवाच
विविक्ते पाण्डवान्सर्वानुवाच भगवानृषिः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
विविक्ते विदितप्रज्ञमर्जुनं भरतर्षभम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
वसिष्ठ उवाच
विवित्समानाय़ विवोधकारकं; प्रवोधहेतोः प्रणतस्य शासनम् ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
विवित्समानो विप्रर्षे स्तव्धो मानी स राजसः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५७
भीष्म उवाच
विवित्सा जाय़ते तत्र तत्त्वज्ञानान्निवर्तते ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
विवित्सोस्तु ततः क्रुद्धो भल्लेनापाहरच्छिरः |
११ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
विविधं भक्ष्यभोज्यं च शकटैरुह्यतां मम ||
२३ ख
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
विविधं वलिमादाय़ रत्नानि विविधानि च ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
विविधं संहिताज्ञानं दीपय़न्ति मनीषिणः |
५१ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
विविधाः सम्भवा राज्ञामुक्ताः सम्भवपर्वणि |
७५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
विविधाचारय़ुक्ताश्च व्राह्मणा भरतर्षभ ||
१२ ख